मेरे प्यारे नाना जी. मेरे नानाजी का नाम दयानंद वर्मा है.
मेरे जीवन में बडो़ का बड़ा महत्व हैं, जीवन में उनके लाड प्यार की तुलना किसी से नहीं की जा सकती है.
बड़े लोग किसी भी परिवार की धरोहर होते हैं इनकी तुलना वट वृक्ष से की जा सकती है, जो अपनी छाँव में सभी को सुरक्षा का भाव प्रदान करते हैं.
मेरे नानाजी को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है . उन्होंने अपने खाली समय में ढेर सारी कवितायेँ लिखी हैं. आज भी जब वे खाली बैठे होते हैं तो कवितायेँ ही लिखतें हैं . वे अपनी कविताओं में अपने एहसास , अपनी सोच, और अपने विचार व्यक्त करते हैं .
उनकी कविताओं में से कुछ मैं आप सब के साथ बांटना चाहती हूँ.